प्रभु के दिन परमेश्वर को महिमा देने वाले रीति से कलीसिया जाने के लिए प्रायोगिक सुझाव

Posted byHindi Editor August 11, 2025 Comments:0

(English version: Practical Suggestions On Attending Church In A God-Glorifying Manner On The Lord’s Day)

यह लेख  “सब्त और प्रभु का दिन” श्रृंखला का अंतिम लेख है | प्रथम लेख में इस प्रश्न पर चर्चा हुई कि, “क्या मसीहियों को सब्त के नियम का पालन करने की आवश्यकता है ?” द्वितीय लेख में इस प्रश्न पर विचार किया गया कि, “क्या मसीहियों को ‘प्रभु का दिन’ को विशेष दिन मानने की आवश्यकता है ?” तीसरे लेख में चर्चा का विषय था,  “प्रभु के दिन कलीसिया जाने से रोकने वाले सामान्य बाधायें” |

अब यह लेख उन प्रायोगिक सुझावों के संबंध में होगा जिनसे प्रभु के दिन परमेश्वर को महिमा देने वाले रीति से कलीसिया जाने में हमें सहायता मिले | मैंने इसे दो व्यापक श्रेणियों में विभाजित किया है : तैयारी और सहभागिता |

क ) तैयारी : 

अक्सर प्रभु के दिन उसकी आराधना करने की तैयारी सभा आरंभ होने से एक या दो घंटा पहले की जाती है | और इससे गड़बड़ी पैदा होती है | हालाँकि हम शनिवार शाम / रात या फिर उससे भी पहले तैयारी करके रविवार सुबह को प्रभु की आराधना प्रभावकारी रूप से कर सकते हैं | 

इसीलिए, नीचे 10 ऐसे कार्य बताये गये हैं जिन्हें शनिवार शाम / रात को करने के लिए आपको सोचना चाहिए |

1. उचित समय पर सोने के लिए जायें :

यह कहना आसान है परन्तु करना मुश्किल | कई प्रतिस्पर्धात्मक और विवश कर देने वाले आकर्षण हमें देर रात तक जगाये रख सकते हैं ( उदाहरण के लिए, टी. वी., इंटरनेट, खेल, लोगों से मिलना – जुलना ) | परन्तु, सच्चाई यह है कि हमारे शरीर को आराम करने के लिए पर्याप्त समय चाहिए | समय पर सोने जाने की आदत न केवल हमको कलीसिया जाने के लिए तैयार करती है बल्कि साथ ही साथ शरीर के थके होने के कारण कलीसिया न जाने के लिए होने वाली परीक्षाओं को भी प्रभावकारी तरीके से ख़त्म करती है |

2. रविवार सुबह के लिए कपड़े तैयार रखें :

शनिवार रात का 5 से 10 मिनट का एक तनावरहित कार्य रविवार सुबह के अनावश्यक तनाव से बचा सकता है |

3. निश्चित करें कि गाड़ी में पर्याप्त पेट्रोल है :

आपको ऐसा लगता होगा कि कलीसिया जाते समय रास्ते में पेट्रोल भराने में बस कुछ मिनट ही तो लगते हैं | परन्तु, यदि किसी को पहले से ही देरी हो गई है तो वे कुछ मिनट तनाव को और बढ़ा सकते हैं | और ज़रा सोचिए, यदि गाड़ी पेट्रोल पम्प तक ही नहीं पहुँची तो क्या होगा ? 

4. चेक के विवरण को पहले से लिख लें :

यदि किसी को कलीसिया में अपनी भेंट को चेक के माध्यम से अर्पित करने की आदत है तो उसके लिए चेक के विवरण को पहले से ही भर के रखना एक अच्छा कदम होगा |

5. पर्याप्त मात्रा में डाईपर्स रखें ( यदि किसी के छोटे बच्चे हैं ) :

यह आवश्यक है कि हम निश्चित करें कि बच्चों की आवश्यकताओं का पूरा ध्यान रखा गया है |

6. यदि आप प्रचार / शिक्षा देने की सेवकाई में हैं तो समस्त सामग्रियों को व्यवस्थित कर लें : 

यहाँ मुख्य शब्द, “व्यवस्थित करना” है “तैयारी” नहीं | तैयारी तो बहुत पहले ही हो जानी चाहिए | यदि आपको इलेक्ट्रानिक उपकरण ( आई – पैड इत्यादि ) इस्तेमाल करने की आदत है तो उपकरण के खराब होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त सहायता के रूप में लिखित या मुद्रित कागज़ – प्रति रखना भी अच्छा होगा | साथ ही साथ उपकरण को चार्ज करना भी अच्छा होगा ताकि सेवा के मध्य में ही उसकी बैटरी ख़त्म न हो जाये | 

7. यदि आप संगीत सेवा में हैं तो वाद्ययंत्रों को तैयार कर लें :

रात में ही म्यूजिक – शीट और वाद्ययंत्रों को इस्तेमाल के लिए पूरी रीति से तैयार कर लेने से सहायता मिलती है |

8. सुबह के नाश्ता और यदि संभव हो तो दोपहर के भोजन की भी योजना बना लें :

भोजन एक बड़ा मुद्दा है और अक्सर यह चुनाव करना कि क्या पकाना है और यह सोचना कि इसे पकाने में कितना समय लगेगा अत्याधिक तनाव का कारण बनता है | परन्तु, आप जो करना है उसकी योजना पिछली रात को बनाकर तनाव से बच सकते हैं |

9. यदि आपकी कलीसिया में प्रीतिभोज के लिए भोजन बनाकर ले जाने का रिवाज है तो उसकी योजना बना लें :

यदि आपकी कलीसिया में प्रीतिभोज के लिए भोजन बनाकर ले जाने का रिवाज है तो अपने परिवार के लिए और दूसरों के साथ बाँटने के लिए ( विशेष रूप से उनके साथ जो अकेले रहते हैं ) पर्याप्त मात्रा में भोजन ले जाने की योजना बनाना अच्छा होगा ! इस तरह से आप दूसरों पर बोझ बनने के स्थान पर उनके लिए आशीष का कारण बन पायेंगे !

10. सोने जाने से पहले बाईबल पढ़ने और प्रार्थना करने में समय बितायें : 

यह सोचना बुद्धिहीनता का प्रदर्शन होगा कि मसीही के 3 शत्रु अर्थात हममें जो पापमय स्वभाव है जिसे हम “देह” कहते हैं, और “संसार” तथा “शैतान” बिना युद्ध किए ही हमें परमेश्वर की बातों का अनुसरण करने देंगे | अवश्य ही हमें इन युद्धों की अपेक्षा करनी चाहिए और पवित्रशास्त्र पर मनन करते हुए और प्रार्थना करते हुए उनका सामना करना चाहिए |

स्तुति करना और अपने पापों को अंगीकार करना हमारे प्रार्थना का हिस्सा होना चाहिए | हमें यह भी निश्चित करना चाहिए कि हम प्रभु के घर में अपने हृदय में कड़वाहट लेकर न आयें | यह हमारी आराधना को रोकता है ( मत्ती 5:23 -24; मरकुस 11:25 ) | पापमय हृदय के साथ आराधना करने और फिर प्रभु भोज में भी भाग ले लेने के दुष्परिणाम गंभीर हो सकते हैं ( 1 कुरिन्थियों 11:27 – 31 ) !

हमें यह स्मरण रखने की आवश्यकता है कि यह आत्मिक युद्ध है | इसीलिए उचित तैयारी एक नितांत आवश्यकता है ! यहाँ तक कि छुट्टी में जाने के समय भी हमें पहले से ही योजना बनाकर प्रभु और उसके लोगों के साथ आराधना करने के लिए बाईबल के अनुसार संचालित होने वाली किसी स्थानीय कलीसिया का पता लगा लेना चाहिए | 

10 ऐसे कार्यों की सूची देखने के पश्चात जिन्हें हमें शनिवार को करने के बारे में सोचना है , आईए अब रविवार सुबह को करने वाले कुछ कार्यों के बारे में सोचें |

6 कार्य जिन्हें रविवार की सुबह करने के बारे में सोचना है :

1. उचित समय पर उठें : 

थोड़ी देर और सो लेने का प्रलोभन हमेशा बना रहता है – यदि आप जल्दी सोये थे तब भी यह प्रलोभन रहता है | पुरानी आदतें जल्दी नहीं छूटतीं | इसीलिए आवश्यकता है कि हम प्रार्थना करें और जैसे ही अलार्म बजे उठ जायें ! 

2. तरोताजा हो जाने के लिए स्नान करें :

पुनरुत्थित राजा यीशु की आराधना करने के लिए आते समय मानसिक और शारीरिक रूप से सचेत रहना अच्छा होगा ! 

3. बाईबल पढ़ने और प्रार्थना करने में समय बितायें :

केवल भौतिक अंगों को ही तरोताजा करने की आवश्यकता नहीं है ( अगला प्वाईंट देखें ) बल्कि साथ ही साथ आत्मिक अंग को भी | कलीसिया में उसकी उपस्थिति की आशीष चाहने के लिए परमेश्वर के वचन में समय गुजारना और हृदय की गहराई से प्रार्थना करने में समय गुजारना अत्याधिक महत्वपूर्ण है | यह भी अच्छा होगा कि हम, जो सेवकाई में हैं उनके लिए प्रार्थना करें और यह प्रार्थना करें कि प्रभु दीन मन के साथ वचन सुनने के लिए लोगों को लेकर आये | उतना ही अच्छा यह प्रार्थना करना भी है कि खोए हुए लोग आयें, सुसमाचार सुनें और उद्धार पायें |

 

4. अच्छा नाश्ता करें :

आपका खाली पेट ( यदि आप उपवास में नहीं हैं तो ) प्रभावकारी रूप से आराधना करने में बाधा पहुँचा सकता है | खाली पेट होने पर शरीर और दिमाग दोनों ही कभी – कभी सही ढंग से काम नहीं करते हैं ! इसीलिए एक नपा -तुला नाश्ता एक आवश्यक बात हो जाती है ! 

5. बच्चों को तैयार करने में अपने जीवनसाथी की सहायता करें : 

यह सुझाव मुख्य रूप से पतियों पर लागू होता है | हमारी पत्नियों को वे सब सहायतायें  मिलनी चाहिए जिनकी उनको आवश्यकता है | ऐसे समय में जब पत्नी पहले से ही अन्य ढेरों  कार्यों में उलझी हुई हो, पति द्वारा बच्चों को जगाना, स्नान के लिए ले जाना और नाश्ता करने में उनकी सहायता करना जैसे छोटे – छोटे कार्यों से भी पत्नी को एक बड़ी राहत मिलती है | एक बच्चा जो तरोताजा हो और जिसका पेट भली – भाँति भरा हुआ हो, अपने माता – पिता के लिए और कलीसिया – परिवार के लिए भी एक आशीष ठहरता है ! 

टिप्पणी : मैं जानता हूँ कि जहाँ माँ या पिता दोनों में से कोई एक ही मसीही हो तो हो सकता है कि उन्हें अपने जीवनसाथी से सहायता न मिले | ऐसी परिस्थिति में बच्चों को तैयार करना उतना आसान नहीं होगा | यदि आप ऐसी एक परिस्थिति में हैं तो हिम्मत मत हारिये | आपका परिश्रम व्यर्थ नहीं जायेगा | स्मरण रखें कि आप यह प्रभु यीशु के लिए कर रहे हैं जो आपके लिए मरा | यह विचार आपको आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित करने पाये ! कौन जाने एक दिन आपके जीवनसाथी का मन परिवर्तन हो जाये | परमेश्वर कठोर हृदयों को परिवर्तित करने के कार्य में लगा हुआ है | इसीलिए कृप्या हिम्मत मत हारिये !

6. जल्दी आने की योजना बनायें : 

जल्दी आने से आपको व्यवस्थित होने, दूसरे लोगों से मिलकर उन्हें उत्साहित करने, कलीसिया में कार्य करने वाले सदस्यों की सहायता करने और आराधना के लिए अपने मन को प्रार्थनापूर्वक तैयार करने के लिए समय मिल सकता है | साथ ही साथ जल्दी आने की योजना बनाने से आप उस तनाव से भी बच जायेंगे जो अचानक आने वाले ट्रैफिक समस्याओं के कारण होते हैं और साथ ही आप देर होने पर परिवार के सदस्यों के मध्य होने वाले बहस से भी बचेंगे | इसके अतिरिक्त आप आराधना करने जाते समय गति सीमा से अधिक गति में गाड़ी चलाने के पाप से भी बचेंगे ! 

जल्दी आकर आप बच्चों के लिए भी एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करते हैं ! यह समय पर पहुँचने के महत्व को दर्शाता है |  यदि हम हमेशा हड़बड़ी में रहते हैं और हर जगह देर से पहुँचते हैं – विशेष रूप से प्रभु की आराधना करने के लिए, तो फिर हम अपने बच्चों के सामने किस प्रकार का उदाहरण रखने वाले बनेंगे ? बच्चे हमारे कार्यों से सीखते हैं !

जैसा कि आप देख सकते हैं कि जल्दी आने की योजना बनाने के कई सकारात्मक पक्ष हैं |

कलीसिया आने से पूर्व शनिवार रात और रविवार सुबह दोनों समय किए जाने वाले तैयारियों के बारे में देखने के पश्चात आईए अब कलीसिया में उपस्थित रहते समय सहभागिता दिखाने के पक्ष को देखें |

ख) सहभागिता 

कलीसिया में होने पर 3 बातों का ध्यान रखें |

1. हमें अवश्य ही आराधना – सेवा की समस्त बातों में सम्पूर्ण मन से भाग लेना चाहिए, गीत गाने से लेकर, वचन सुनने, प्रार्थना करने और प्रभु – भोज में सम्मिलित होने तक की सारी बातों में | प्रभु यीशु हमारे सम्पूर्ण मन से किए जाने वाले आराधना का हकदार है !

2. हमें अवश्य ही लोगों के साथ संगति करनी चाहिए और एक दूसरों को प्रोत्साहित करना चाहिए | पहली बार आये लोगों से मिलने और उनसे बात करने के लिए भी हमें अवश्य ही इच्छुक होना चाहिए | मात्र अपने जान पहचान वालों के साथ ही समय बिताने की हमारी प्रवृत्ति पर हमें जय पाना चाहिए |

3. हमें अवश्य ही पूरे समय तक रुकने की योजना बनानी चाहिए : इसीलिए हमें सभा के तुरंत  पश्चात ढेर सारे कार्य करने की योजना नहीं बनानी चाहिए ( बेशक अपवाद स्वरुप ऐसे समय भी आयेंगे )| यदि हम कई कार्यों को करने की ठान चुके हैं, तो हम लगातार घड़ी ही देखते रहेंगे और यदि सभा को ख़त्म होने में थोड़ा विलंब हो जाए, तो हम परेशान हो उठेंगे | याद रखें, यह प्रभु का दिन है !  

समापन विचार :

अधिकाँश पाठकों के लिए इन सुझावों में से अधिकाँश सुझाव नए नहीं होंगे | परन्तु ये तब भी प्रभु के दिन को उसके दिन के रूप में मानने में हमारी सहायता करने के लिए एक उत्कृष्ट अनुस्मारक हो सकते हैं |

इस लेख – श्रृंखला में मैंने जो कुछ भी लिखा है उन्हें मैंने कर्मकांडवादी मन से नहीं लिखा है – हालाँकि मैंने वैसा समझे जाने का जोखिम उठाया है | यह सच है कि हम अपने प्रभु यीशु मसीह द्वारा पूर्ण किए गए उद्धार के कार्य में कुछ भी घटा या बढ़ा नहीं सकते हैं | परन्तु, जो छुटकारा इतनी बड़ी कीमत पर प्राप्त हुई है, उसे एक गंभीर संकल्प के साथ स्वीकार किया जाना चाहिए और गंभीर संकल्प के साथ ही इस छुटकारा के जीवन को जीना चाहिए |  और इसमें प्रभु के दिन प्रभु का आदर करने की बात सम्मिलित है | 

जब हम प्रभु के दिन को प्रभु के दिन के रूप में सम्मान देते हैं, तो हम वास्तव में यह कहते हैं, “प्रभु मैं आपसे प्रेम करता हूँ, मैं आपका सम्मान करना चाहता हूँ | और यदि ‘अपने आप का इनकार करने’ की कीमत पर ऐसा होता है तो ऐसा करने में मेरी सहायता करें | आप योग्य हैं | जिस प्रकार से सप्ताह के प्रथम दिन मैं आपको आदर देता हूँ वैसा ही आदर सप्ताह के समस्त दिनों में देने में मेरी सहायता करें |” और यदि हम असफल हो जायें तो उसके पास यह प्रार्थना करते हुए जायें, “प्रभु, मुझे क्षमा करें और जिन क्षेत्रों में मुझे बदलने की आवश्यकता है उन क्षेत्रों में बदलाव लाने में मेरी सहायता करें |” मैं आशा करता हूँ कि यह प्रार्थना हमारे हृदय की निरंतर पुकार बनेगी |

( यदि आपके पास अन्य बातें हैं जो उपरोक्त सूची में जोड़ी जा सकती हैं तो कृप्या उसे हमारे साथ बाँटें ताकि दूसरों को भी लाभ पहुँच सके | एक अर्थ में कहें तो प्रभु के दिन परमेश्वर की महिमा करने के इस लक्ष्य का पीछा करने में हम सब एक साथ जुड़े हुए हैं | )   

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