क्या मसीहियों को सब्त के नियम का पालन करने की आवश्यकता है ?
(English version: Are Christians Required To Keep The Sabbath?)
सामान्य रूप से देखें, तो सब्त अर्थात विश्राम – दिन और मसीहियों के मध्य के संबंध के बारे में तीन विचारधारायें दिखाई पड़ते हैं |
विचारधारा # 1. सब्तवादी विचारधारा : इस विचारधारा के अनुसार, मसीहियों को सब्त के दिन आराधना करनी चाहिए – अर्थात शनिवार के दिन | इस श्रेणी में, विशेष रूप से 7th Day Adventists ( सेवन्थ डे एडवेंटिस्ट्स ) आते हैं |
जो लोग इस विचारधारा का समर्थन करते हैं वे यह बात सही कहते हैं कि शनिवार का दिन, सब्त का दिन है परन्तु उनकी यह बात गलत है कि मसीहियों को शनिवार को आराधना करने की आज्ञा दी गई है |
विचारधारा # 2. रविवारीय सब्त विचारधारा : इस विचारधारा के अनुसार, जिस प्रकार से पुराना नियम में शनिवार सब्त का दिन था, वैसे ही, प्रभु का दिन रविवार मसीहियों के लिए सब्त का दिन है और इसका पालन समस्त मसीहियों को करना चाहिए | कैथोलिक और साथ ही साथ कई प्रोटेस्टेंट भी इस विचारधारा को मानते हैं | इस विचारधारा को मुख्य रूप से 16वीं सदी में प्यूरिटन्स ( Puritans ) के समयकाल में अपनाया गया |
हालाँकि रविवार को आराधना करना सही है तौभी रविवार को मसीही सब्त कहना गलत है क्योंकि बाईबल कहीं पर भी नहीं बताती है कि पूरा नियम का शनिवार का सब्त नया नियम में रविवार के सब्त में स्थानांतरित हो गया है |
विचारधारा # 3. बाईबल – सम्मत विचारधारा : इस विचारधारा के अनुसार, शनिवार का दिन सब्त का दिन है | परन्तु, नया नियम में कहीं पर भी मसीहियों को इस नियम का पालन करने की आज्ञा नहीं दी गई है | इस विचारधारा को वे लोग रखते हैं जो पुराना नियम और नया नियम में पाए जाने वाले बाईबल के लेख का सम्मान करते हैं |
हम प्रभु के दिन को विशेष मानते हैं, परन्तु ऐसा इसलिए नहीं करते हैं क्योंकि ऐसा करने की एक विशेष आज्ञा दी गई है बल्कि ऐसा हम इसलिए करते हैं क्योंकि यह आरंभिक कलीसिया का अभ्यास था जैसा कि नया नियम और कलीसियाई इतिहास में लिपिबद्ध है |
यह लेख, बाईबल का एक त्वरित सर्वेक्षण करते हुए इस तीसरी विचारधारा के प्रति समर्थन प्रदर्शित करेगी |
पुराना नियम में सब्त:
1. सृष्टि – रचना सप्ताह:
उत्पत्ति 2:2 बताता है, “परमेश्वर ने अपना काम जिसे वह करता था सातवें दिन समाप्त किया। और उसने अपने किए हुए सारे काम से सातवें दिन विश्राम किया |“ यहाँ प्रयुक्त, “विश्राम” शब्द इब्रानी भाषा के ‘शबथ’ का अनुवाद है, जिसका अर्थ है, विश्राम करना या गतिविधि समाप्त करना | कृप्या इस बात पर ध्यान दीजिए कि यह भाग मात्र यह कहता है कि परमेश्वर ने विश्राम किया | ऐसा नहीं था कि परमेश्वर ने इसलिए विश्राम किया क्योंकि वह थक गया था | यशायाह 40:28 ऐसे गलत विचारधाराओं को खारिज़ करता है, “यहोवा जो सनातन परमेश्वर और पृथ्वी भर का सिरजनहार है, वह न थकता, न श्रमित होता है, उसकी बुद्धि अगम है |“ परमेश्वर ने इसलिए विश्राम किया क्योंकि सृष्टि – रचना संबंधी समस्त गतिविधियाँ पूर्ण हो चुकी थीं | यह पूर्णता से उत्पन्न एक विश्राम था |
परमेश्वर या मनुष्यों द्वारा 7वें दिन विश्राम करने का सन्दर्भ हम उत्पत्ति की पुस्तक में और कहीं पर भी नहीं पाते हैं | आदम से लेकर मूसा तक ( उत्पत्ति 3 से निर्गमन 15 तक ) सब्त का कोई उल्लेख नहीं है | हाबिल, हनोक, नूह, इब्राहीम, इसहाक, याकूब और युसूफ जैसे भक्त लोगों को 7वें दिन विश्राम करने की आज्ञा नहीं दी गई थी और न ही कहीं यह लिखा है कि उन्होंने 7वें दिन विश्राम किया | और तब भी इब्रानियों 11 अध्याय में उनके विश्वास के कारण उन सबकी प्रशंसा की गई है !
2. सब्त का दिन:
उत्पत्ति 2:2 के पश्चात सब्त के दिन का अगला उल्लेख निर्गमन की पुस्तक में है जहाँ प्रभु द्वारा इस्राएलियों को मिस्र से निकाल लाने के पश्चात उनके द्वारा जंगल में मन्ना बटोरने का सन्दर्भ है ( निर्गमन 16:11 – 15 ) | परमेश्वर ने इस्राएलियों को केवल छः दिनों तक मन्ना बटोरने की आज्ञा दी थी, सातवें दिन नहीं | निर्गमन 16:23 कहता है, “यह तो वही बात है जो यहोवा ने कही, क्योंकि कल परमविश्राम, अर्थात यहोवा के लिये पवित्र विश्राम होगा; इसलिये तुम्हें जो तन्दूर में पकाना हो उसे पकाओ, और जो सिझाना हो उसे सिझाओ, और इस में से जितना बचे उसे बिहान के लिये रख छोड़ो |”
सब्त के दिन के नियम का पालन करने की आज्ञा इस्राएल राष्ट्र को दी गई और परमेश्वर के निर्देशानुसार मूसा ने इसे बाद में 10 आज्ञाओं का एक भाग बना दिया |
निर्गमन 20:8 – 11, “8 तू विश्रामदिन को पवित्र मानने के लिये स्मरण रखना | 9 छ: दिन तो तू परिश्रम करके अपना सब काम काज करना; 10 परन्तु सातवां दिन तेरे परमेश्वर यहोवा के लिये विश्रामदिन है | उस में न तो तू किसी भांति का काम काज करना, और न तेरा बेटा, न तेरी बेटी, न तेरा दास, न तेरी दासी, न तेरे पशु, न कोई परदेशी जो तेरे फाटकों के भीतर हो | 11 क्योंकि छ: दिन में यहोवा ने आकाश, और पृथ्वी, और समुद्र, और जो कुछ उन में है, सब को बनाया, और सातवें दिन विश्राम किया; इस कारण यहोवा ने विश्रामदिन को आशीष दी और उसको पवित्र ठहराया |“
ध्यान देने योग्य एक महत्वपूर्ण बात यह है कि : परमेश्वर ने यह आज्ञा केवल इस्राएल राष्ट्र को दिया, किसी भी अन्य राष्ट्र को नहीं – यदि कोई परदेशी इस्राएल देश में निवास करता था तो वह इस नियम से बंधा था, उस व्यक्ति को सब्त का पालन करना पड़ता ( निर्गमन 20:10 ) | सब्त का दिन इस्राएल के लिए दिया गया, एक विश्राम दिन के रूप में और भौतिक देह के तरोताजा हो जाने के लिए एवं आत्मा के लिए भी एक आशीष बन जाने के लिए |
निर्गमन 31:12 – 17 सब्त के बारे में और अधिक सच्चाईयों को सिखाता है | पद 13 कहता है कि खतना के समान ही सब्त भी परमेश्वर और इस्राएलियों के मध्य एक चिन्ह था, “मेरे और तुम लोगों के बीच यह एक चिन्ह ठहरा है | ” पद 14 इस बात को स्पष्ट करता है कि सब्त – उल्लंघन दंडनीय अपराध था जिसके लिए मृत्युदंड निर्धारित था, “जो उसको अपवित्र करे वह निश्चय मार डाला जाए“ | पद 16 – 17 शिक्षा देता है कि सब्त के दिन की आज्ञा केवल मूसा की व्यवस्था के अधीन रहने वाले इस्राएलियों के ऊपर ही बंधनकारी था, “16 सो इस्राएली विश्रामदिन को माना करें … | 17 वह मेरे और इस्त्राएलियों के बीच सदा एक चिन्ह रहेगा |“
व्यवस्थाविवरण 5:15 कहता है कि इस्राएल को सब्त का पालन करना था क्योंकि परमेश्वर ने उन्हें दासत्व से छुड़ाया था, “और इस बात को स्मरण रखना कि मिस्र देश में तू आप दास था, और वहां से तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे बलवन्त हाथ और बढ़ाई हुई भुजा के द्वारा निकाल लाया; इस कारण तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे विश्रामदिन मानने की आज्ञा देता है |“
सब्त के दिन जिन कुछ कार्यों को करने के लिए इस्राएलियों को मना किया गया था, वे ये थे : आग जलाना ( निर्गमन 35:3 ), मन्ना बटोरना ( निर्गमन 16:23 – 29 ), सामान बेचना ( नहेम्याह 10:3; 13:15 – 22 ), और बोझ उठाना ( यिर्मयाह 17:19 – 27 ) | यीशु मसीह के समय में रहने वाले यहूदी ‘दूरी संबंधी नियम’ का भी पालन किया करते थे जिसका अर्थ था कि सब्त के दिन 3/4 मील से अधिक की कोई यात्रा नहीं होनी चाहिए थी | एक टिप्पणीकार के अनुसार, इस दूरी की गणना निर्गमन 16:29 (तुम अपने अपने यहां बैठे रहना ) की व्याख्या गिनती 35:5 के साथ तुलना करने के द्वारा की गई थी, गिनती 35:5 में एक नगर की सीमा 2,000 हाथ (3/4 मील से कम ) बताई गई है | इस प्रकार से कोई व्यक्ति ‘अपने स्थान’ ( नगर ) को नहीं छोड़ सकता था, अर्थात, इसकी सीमा के बाहर नहीं जा सकता था |
3. सब्त – वर्ष और जुबली वर्ष :
निर्गमन 23:10 – 11 के अनुसार प्रत्येक सातवें वर्ष भूमि पड़ती ( बिना जोते – बोये ) छोडी जानी चाहिए थी, “10 छ: वर्ष तो अपनी भूमि में बोना और उसकी उपज इकट्ठी करना; 11 परन्तु सातवें वर्ष में उसको पड़ती रहने देना और वैसा ही छोड़ देना, तो तेरे भाई बन्धुओं में के दरिद्र लोग उससे खाने पाएं, और जो कुछ उन से भी बचे वह बनैले पशुओं के खाने के काम में आए। और अपनी दाख और जलपाई की बारियों को भी ऐसे ही करना |“ ( लैव्यव्यवस्था 25:1-7 भी देखिए ) |
प्रत्येक सातवें वर्ष के साथ ही साथ भूमि को प्रत्येक 50वें वर्ष भी पड़ती रहने देना था : “10 और उस पचासवें वर्ष को पवित्र करके मानना, और देश के सारे निवासियों के लिये छुटकारे का प्रचार करना; वह वर्ष तुम्हारे यहां जुबली कहलाए; उस में तुम अपनी अपनी निज भूमि और अपने अपने घराने में लौटने पाओगे | 11 तुम्हारे यहां वह पचासवां वर्ष जुबली का वर्ष कहलाए; उस में तुम न बोना, और जो अपने आप उगे उसे भी न काटना, और न बिन छाँटी हुई दाखलता की दाखों को तोड़ना | 12 क्योंकि वह जो जुबली का वर्ष होगा; वह तुम्हारे लिये पवित्र होगा; तुम उसकी उपज खेत ही में से ले लेके खाना |” (लैव्यव्यवस्था 25:10-12 ) |
अतः, संक्षेप में कहें तो यहूदियों को मूसा के व्यवस्था के अंतर्गत साप्ताहिक सब्त, प्रत्येक सातवें वर्ष आने वाले सब्त – वर्ष और प्रत्येक 50वें वर्ष आने वाले जुबली का पालन करना होता था |
सब्त – उल्लंघन का दण्ड:
लैव्यव्यवस्था 26:33 – 35, सब्त के नियम का पालन करने में असफल रहने पर परमेश्वर के दण्ड के बारे में एक चेतावनी देता है, “33 और मैं तुम को जाति जाति के बीच तित्तर-बित्तर करूंगा, और तुम्हारे पीछे पीछे तलवार खीचें रहूंगा; और तुम्हारा देश सूना हो जाएगा, और तुम्हारे नगर उजाड़ हो जाएंगे | 34 तब जितने दिन वह देश सूना पड़ा रहेगा और तुम अपने शत्रुओं के देश में रहोगे उतने दिन वह अपने विश्रामकालों को मानता रहेगा | 35 और जितने दिन वह सूना पड़ा रहेगा उतने दिन उसको विश्राम रहेगा, अर्थात जो विश्राम उसको तुम्हारे वहां बसे रहने के समय तुम्हारे विश्रामकालों में न मिला होगा वह उसको तब मिलेगा |”
दुर्भाग्यवश, यहूदियों ने परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह किया और अन्य पापों के साथ ही साथ, सब्त को अपवित्र करने का पाप भी किया | अतः, परमेश्वर ने बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर के हाथों न्याय को लाकर अपने वचन को पूरा किया |
2 इतिहास 36:17-21, “17 तब उसने उन पर कसदियों के राजा से चढ़ाई करवाई, और इस ने उनके जवानों को उनके पवित्र भवन ही में तलवार से मार डाला। और क्या जवान, क्या कुंवारी, क्या बूढ़े, क्या पक्के बाल वाले, किसी पर भी कोमलता न की; यहोवा ने सभों को उसके हाथ में कर दिया | 18 और क्या छोटे, क्या बड़े, परमेश्वर के भवन के सब पात्र और यहोवा के भवन, और राजा, और उसके हाकिमों के खजाने, इन सभों को वह बाबेल में ले गया | 19और कसदियो ने परमेश्वर का भवन फूंक दिया, और यरूशलेम की शहरपनाह को तोड़ ड़ाला, और आग लगा कर उसके सब भवनों को जलाया, और उस में का सारा बहुमूल्य सामान नष्ट कर दिया | 20 और जो तलवार से बच गए, उन्हें वह बाबेल को ले गया, और फारस के राज्य के प्रबल होने तक वे उसके और उसके बेटों-पोतों के आधीन रहे | 21 यह सब इसलिये हुआ कि यहोवा का जो वचन यिर्मयाह के मुंह से निकला था, वह पूरा हो, कि देश अपने विश्राम कालों में सुख भोगता रहे | इसलिये जब तक वह सूना पड़ा रहा तब तक अर्थात सत्तर वर्ष के पूरे होने तक उसको विश्राम मिला |“ ( यिर्मयाह 17:19-27; 25:11 भी देखिए | )
यह दुखद था कि बंधुवाई से लौटने के पश्चात भी यहूदियों ने सबक नहीं सिखा था, और वे सब्त के दिन भी खरीदने – बेचने में लगे हुए थे | नहेम्याह के समय में यहूदी सब्त के दिन भी खरीदने और बेचने के कार्य में लगे हुए थे, जिसके कारण नहेम्याह ने उन्हें डाँटा, “16 फिर उस में सोरी लोग रहकर मछली और भांति भांति का सौदा ले आकर, यहूदियों के हाथ यरूशलेम में विश्रामदिन को बेचा करते थे | 17 तब मैं ने यहूदा के रईसों को डांट कर कहा, तुम लोग यह क्या बुराई करते हो, जो विश्रामदिन को अपवित्र करते हो ? 18 क्या तुम्हारे पुरखा ऐसा नहीं करते थे ? और क्या हमारे परमेश्वर ने यह सब विपत्ति हम पर और इस नगर पर न डाली? तौभी तुम विश्रामदिन को अपवित्र करने से इस्राएल पर परमेश्वर का क्रोध और भी भड़काते जाते हो … 22 तब मैं ने लेवियों को आज्ञा दी, कि अपने अपने को शुद्ध कर के फाटकों की रखवाली करने के लिये आया करो, ताकि विश्रामदिन पवित्र माना जाये “ ( नहेम्याह 13:16 – 18, 22 ) |
अतः, हम देखते हैं कि सब्त की आज्ञा बंधुवाई से लौटने के पश्चात भी बंधनकारी थी | पुराना नियम में सब्त का अवलोकन करने के पश्चात अब आईए हम नया नियम की ओर चलें |
नया नियम में सब्त:
1. यीशु मसीह की शिक्षा
सब्त के लिए परमेश्वर ने जितने नियम दिए थे यहूदी लोगों ने यीशु मसीह के समय तक आते – आते उनमें कई और नियम जोड़ दिए थे | परिणामस्वरूप, यह आशीष के स्थान पर एक बोझ बन गया | यीशु मसीह ने अपनी सेवकाई में इन शिक्षाओं की आलोचना की और वे अक्सर उन कार्यों को करने के कारण विवाद में बने रहे जो यहूदी अगुवों के अनुसार सब्त का उल्लंघन करना था – मुख्य रूप से, सब्त के दिन उनके द्वारा लोगों को चंगाई दिए जाने को कार्य माना गया | परन्तु, यीशु मसीह ने यह दर्शाने के लिए बारम्बार लोगों को चंगा किया कि सब्त एक ऐसा दिन था जिसमें अपने पड़ोसी के साथ भला किया जाये |
मत्ती 12:9 – 14, “9 वहां से चलकर वह उन की सभा के घर में आया | 10 और देखो, एक मनुष्य था, जिस का हाथ सूखा हुआ था; और उन्होंने उस पर दोष लगाने के लिये उस से पूछा, कि क्या सब्त के दिन चंगा करना उचित है ? 11 उस ने उन से कहा; तुम में ऐसा कौन है, जिस की एक ही भेड़ हो, और वह सब्त के दिन गड़हे में गिर जाए, तो वह उसे पकड़कर न निकाले ? 12 भला, मनुष्य का मूल्य भेड़ से कितना बढ़ कर है; इसलिये सब्त के दिन भलाई करना उचित है: तब उस ने उस मनुष्य से कहा, अपना हाथ बढ़ा | 13 उस ने बढ़ाया, और वह फिर दूसरे हाथ की नाईं अच्छा हो गया | 14 तब फरीसियों ने बाहर जाकर उसके विरोध में सम्मति की, कि उसे किस प्रकार नाश करें ?“
मरकुस 2:23 – 28, “23 और ऐसा हुआ कि वह सब्त के दिन खेतों में से होकर जा रहा था; और उसके चेले चलते हुए बालें तोड़ने लगे | 24 तब फरीसियों ने उस से कहा, देख; ये सब्त के दिन वह काम क्यों करते हैं जो उचित नहीं ? 25 उस ने उन से कहा, क्या तुम ने कभी नहीं पढ़ा, कि जब दाऊद को आवश्यकता हुई और जब वह और उसके साथी भूखे हुए, तब उस ने क्या किया था ? 26 उस ने क्योंकर अबियातार महायाजक के समय, परमेश्वर के भवन में जाकर, भेंट की रोटियां खाईं, जिसका खाना याजकों को छोड़ और किसी को भी उचित नहीं, और अपने साथियों को भी दीं ? 27 और उस ने उन से कहा; सब्त का दिन मनुष्य के लिये बनाया गया है, न कि मनुष्य सब्त के दिन के लिये | 28 इसलिये मनुष्य का पुत्र सब्त के दिन का भी स्वामी है |”
कर्मकाण्डवाद सदैव परमेश्वर की आज्ञाओं को हानि पहुँचाता है – अपने पड़ोसी से प्रेम करने की आज्ञा को भी | इसीलिए प्रभु यीशु ने सीधे तौर पर इसकी आलोचना की ! यीशु मसीह ने हमारे लिए एक सिद्ध स्थानापन्न बनने के लिए व्यवस्था की सारी माँगों को पूरा किया – इससे तात्पर्य सब्त के पालन से भी है – उस रीति से पालन जिस रीति से परमेश्वर चाहता था, न कि फरीसियों के द्वारा बिगाड़ दिए गए रीति से |
2. पौलुस की शिक्षा
पौलुस ने अक्सर आराधनालय में सब्त के दिन का उपयोग सुसमाचार प्रचार के लिए किया | उसने ऐसा इसलिए नहीं किया क्योंकि उसे सब्त के नियम का पालन करने की आवश्यकता महसूस होती थी परन्तु इसलिए क्योंकि वह जानता था कि यहूदी लोग एक ही स्थान में थे और उस बात ने उसे सुसमाचार प्रचार करने का एक मंच दे दिया | परन्तु जब इस बात पर विचार किया गया कि क्या हम अब भी व्यवस्था के आधीन हैं, तो पौलुस ने एक स्पष्ट उत्तर दिया : हम अब व्यवस्था के आधीन नहीं हैं और इसीलिए अब हमसे यह माँग नहीं की जाती है कि हम सब्त के नियम का पालन करें जो कि व्यवस्था का एक हिस्सा था |
गलातियों 5:1, “1 मसीह ने स्वतंत्रता के लिये हमें स्वतंत्र किया है; सो इसी में स्थिर रहो, और दासत्व के जूए में फिर से न जूतो |“
रोमियों 7:6, “… अब व्यवस्था से ऐसे छूट गए, कि लेख की पुरानी रीति पर नहीं, वरन आत्मा की नई रीति पर सेवा करते हैं |“
कुलुस्सियों 2:16 – 17, “16 इसलिए खाने पीने या पर्व या नए चान्द, या सब्तों के विषय में तुम्हारा कोई फैसला न करे | 17 क्योंकि ये सब आने वाली बातों की छाया हैं, पर मूल वस्तुएं मसीह की हैं |”
कुलुस्सियों 2 के इन बातों से अधिक स्पष्ट और कुछ नहीं हो सकता है जहाँ यह बताया गया हो कि मसीही लोग अब सब्त के नियमों के आधीन नहीं हैं | सब्त सहित, मूसा की व्यवस्था के समस्त नियम आनेवाली वस्तुओं के छाया मात्र थे | मूल वास्तविकता मसीह है | सब्त, मसीह में पाई जाने वाली उस महान वास्तविकता की ओर देख रहा था और एक बार जब मूल वास्तविकता अर्थात मसीह आ गया तो इसने अपना महत्व खो दिया | हमें अब छायाओं पर ध्यान केन्द्रित नहीं करना है – अर्थात सब्त या अन्य धार्मिक अवकाश दिवसों और खान – पान संबंधी नियमों पर | हम अब इनका पालन करने के लिए बाध्य नहीं हैं |
3. इब्रानियों की पत्री के लेखक की शिक्षा
इब्रानियों की पत्री का लेखक भी ठीक उसी बात को कहता है जो पौलुस ने कही |
इब्रानियों 4:8 – 11, “8 और यदि यहोशू उन्हें विश्राम में प्रवेश कर लेता, तो उसके बाद दूसरे दिन की चर्चा न होती | 9 सो जान लो कि परमेश्वर के लोगों के लिये सब्त का विश्राम बाकी है | 10 क्योंकि जिस ने उसके विश्राम में प्रवेश किया है, उस ने भी परमेश्वर की नाईं अपने कामों को पूरा करके विश्राम किया है | 11 सो हम उस विश्राम में प्रवेश करने का प्रयत्न करें, ऐसा न हो, कि कोई जन उन की नाईं आज्ञा न मान कर गिर पड़े |“
इब्रानियों का लेखक 4:8 – 12 में जिस विश्राम की बात कर रहा है, वह ‘ साप्ताहिक सब्त का विश्राम ‘ नहीं है, और न ही यह ‘ कनान का विश्राम ‘ है, जो यहोशू दे चुका था, परन्तु यह तो ‘ स्वर्गीय विश्राम ‘ है – यीशु मसीह द्वारा उन सबको दिया गया उद्धार का विश्राम जो उस पर विश्वास करते हैं | अतः, उस विश्राम में प्रवेश करने की आज्ञा हमें दी गई है, सब्त के 7वें दिन के विश्राम में नहीं |
भविष्य के सहस्त्राब्दी ( 1000 वर्ष ) राज्य में सब्त :
आने वाले 1000 वर्ष के राज्य में जिसे यीशु मसीह अपने दुबारा आगमन के दौरान स्थापित करेंगे ( प्रकाशितवाक्य 20:4-6 ), हम सब्त के नियम का पालन करेंगे | यरूशलेम में भविष्य में बनने वाले मंदिर ( अभी भी भविष्य की बात ) के सन्दर्भ में और उस समय के सन्दर्भ में जब इस्राएल अपने मसीह अर्थात यीशु की ओर फिरने के परिणामस्वरूप पूर्ण आशीष का अनुभव करेगा यहेजकेल 46:3 यह कहता है : “लोग विश्राम और नये चांद के दिनों में उस फाटक के द्वार में यहोवा के साम्हने दण्डवत करें |”
चूँकि सहस्त्राब्दी राज्य भविष्य की बात है और हम अभी भी प्रभु यीशु मसीह के प्रथम और द्वितीय आगमन के मध्य के समय में जी रहे हैं, इसीलिए हम सब्त या किसी भी अन्य पवित्र दिन के नियम का पालन करने के लिए बाध्य नहीं हैं |
समापन विचार :
हालाँकि विश्राम करने और तरोताजा हो जाने के लिए एक दिन अलग रखना एक अच्छी बात है तौभी हम सब्त की आज्ञा का पालन करने के लिए बाध्य नहीं हैं जो कि पुरानी वाचा के अंतर्गत केवल इस्राएल देश लिए अनिवार्य था | मसीही लोग पुरानी वाचा के आधीन नहीं हैं | इसके परिणामस्वरूप हम सब्त के दिन का पालन करने के लिए भी बाध्य नहीं हैं | सब्त का दिन आज भी शनिवार को ही है और यह उनके लिए है जो पुरानी वाचा के आधीन हैं | सब्त का दिन रविवार को स्थानांतरित नहीं हो गया है |
इसके अलावा, बाईबल में कहीं पर यह नहीं कहा गया है कि मसीहियों के लिए प्रभु का दिन सब्त का दिन है – कहीं पर भी नहीं ! नया नियम की स्पष्ट शिक्षा यही है | यद्यपि कुछ मसीही लोग कहते हैं कि विश्वासियों के लिए प्रभु का दिन, सब्त का दिन है, परन्तु मैं इस शब्दावली को पसंद नहीं करता हूँ क्योंकि यह बाईबल – सम्मत नहीं है | बाईबल संबंधित विषयों पर बात करते समय बाईबल की सटीक शिक्षाओं का पालन करना ही सदैव अच्छा होता है |
आगामी लेख में हम प्रभु का दिन और मसीहियों के मध्य रिश्ते को देखेंगे |
